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जिले में काजू उत्पादन की संभावनाओं पर कार्यशाला का हुआ आयोजन।

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बालाघाट। आज दिनांक 28 फरवरी 2022 को राणा हनुमान सिंह कृषि विज्ञान केन्द्र, बड़गांव, बालाघाट, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग बालाघाट, कृषक कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, बालाघाट, कृषि महाविद्यालय, मुरझड़ फार्म, बालाघाट द्वारा काजू एवं कोको विकास निदेशालय, कोच्चि तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकर, नई दिल्ली के सहयोग से “बालाघाट जिले में काजू उत्पादन की संभावनाएं’’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में बालाघाट-सिवनी लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ ढालसिंह बिसेन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पंचायत की प्रधान श्रीमती रेखा बिसेन, द्वारा की गई। कार्यक्रम में विशिष्ठ अतिथि डॉ. नवीन पटले, अपर आयुक्त बागवानी एवं निदेशक मधुमक्खी पालन बोर्ड, नई दिल्ली, डॉ. एन.के. बिसेन, अधिष्ठाता, कृषि महाविद्यालय, मुरझड़ फार्म, वारासिवनी थें।
खाद्यान्न के साथ फल, फूल, सब्जी की खेती को अपनायें—सांसद डॉ बिसेन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद डॉ. बिसेन ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि कृषकों को ऐसा प्रयास करना चाहिए कि हमारी आमदानी कैसे बढ़े। इसके लिए फसल उत्पादन के साथ-साथ फल उत्पादन, सब्जी उत्पादन, फूल उत्पादन आदि को भी अपनाना चाहिए। कम से कम पानी में अधिक से अधिक उत्पादन कैसे ले उस तकनीकी पर खेती करना चाहिए । इसके लिए ड्रिप सिंचाई पद्धति तथा स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति का उपयोग करना चाहिए। ड्रिप सिंचाई तथा स्प्रिंकलर सिंचाई की सुविधा का लाभ लेने के लिए शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि काजू एक नगदी फसल है और बालाघाट जिले में इसकी खेती के लिए अच्छी संभावनायें विद्यमान है। इसके साथ ही सांसद डॉ. बिसेन ने अतिरिक्त आमदानी के लिए मधुमक्खी पालन करने का सुझाव भी दिया।
काजू की खेती से जिले को नई पहचान मिलेगी—श्रीमती रेखा बिसेन
कार्यक्रम की अध्यक्ष श्रीमती रेखा बिसेन ने कृषकों को संबोधित करते हुए कहा कि अधिक लाभ प्राप्त करने तथा कृषकों की आय दुगनी करने के लिए आवश्यक हैं कि फसल उत्पादन के साथ-साथ काजू उत्पादन या अन्य फलों की खेती की जाती हैं तो निश्चित ही जिले के कृषकों को लाभ होगा। जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में काजू की खेती को प्रोत्साहित किया जायेगा तो वहां के किसानों की आय में वृद्धि होगी। जिले के बैहर, बिरसा, परसवाड़ा एवं लांजी क्षेत्र में काजू की खेती के लिए उपयुक्त वातावरण है। काजू की खेती महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी मददगार बनेगी। उद्यानिकी विभाग की ओर से किसानों को काजू के पौधे उपलब्ध कराये जायेंगे तो निश्चित रूप से काजू की फसल बालाघाट जिले के लिए एक नई पहचान बनेगी।
विशिष्ठ अतिथि डॉ. नवीन पटले, अपर आयुक्त बागवानी एवं निदेशक, मधुमक्खी पालन बोर्ड, नई दिल्ली ने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत बैहर विकासखंड में काजू की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा हैं एवं काजू की खेती के अच्छे परिणाम भी प्राप्त हो रहें हैं। बालाघाट जिले में इसका उत्पादन बड़े क्षेत्र में लेने की आवश्यकता हैं। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र, बड़गांव, बालाघाट तथा उद्यानिकी विभाग बालाघाट के मार्गदर्शन में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई हैं। कार्यक्रम के दौरान डॉ. एम.जी. नायक, भूतपूर्व, संचालक, काजू अनुसंधान केन्द्र, पुत्तुर, कर्नाटक तथा श्री बाबा साहेब देसाई, उपसंचालक, काजू एवं कोको विकास निदेशालय, कोच्चि द्वारा काजू उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकी एवं समस्याओं के निराकरण के विषय में विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम की शुरूआत में कृषि विज्ञान केन्द्र, बड़गांव, बालाघाट के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. आर.एल. राऊत ने कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम के दौरान सहायक संचालक उद्यानिकी श्री सी.बी. देशमुख तथा उपसंचालक कृषि श्री राजेश खोबरागड़े ने भी कृषकों को मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र, बड़गांव, बालाघाट के वैज्ञानिक डॉ. एस.आर. धुवारे, डॉ. रमेश अमूले, श्री धर्मेन्द्र आगाशे, कु. अंजना गुप्ता, श्रीमति अन्नपूर्ण शर्मा, कृषि विभाग तथा उद्यानिकी विभाग के अधिकारी कर्मचारी तथा जिले के करीब 125 प्रगतिशील कृषक उपस्थित रहें। कार्यक्रम का संचालन कृषि महाविद्यालय बालाघाट के सहायक प्राध्यापक डॉ. शरद बिसेन ने किया तथा आभार श्री सी.बी. देशमुख, सहायक संचालक उद्यानिकी ने किया।

Reportar T.R. patle

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